टंकी में चुड़ेल

bhutiya tanki ki kahani I भूतिया टंकी की कहानी

आज से करीब 15 साल पहले की बात है। बिहार में एक मनोला नामक गांव हुआ करता था। जहा पर करीब 20 घर थे और सभी लोग खेती कर के अपना जीवन बिताते थे। लेकिन उस साल बारिश ना होने के कारण गाव में सुखा पड़ने लगा । ओर सभी को खेती की चिंता सताने लगी। गांव के बाहर एक पानी की टंकी थी जिसमे हमेसा पानी भरा रहता था। तो किसानों ने मिलकर यह निश्चय किया की हमलोग खेती के लिए अब इसी टंकी के पानी का उपयोग करेगे।

ओर सबसे पहले महेश नाम के किसान ने अपने खेतों में पानी डाली। फिर वह अगले सुबह देखा तो उसके खेत जल चुके थे। जैसे मानो किसी ने आग लगा दी हो। लेकिन किसी को भी पानी की टंकी पर सक नही हुआ। अगले दिन दूसरे किसान सोनू ने अपने खेतों में पानी डाली। फिर अगले दिन वह खेतों में काम करने आया तो उसकी आंखे फटी की फटी रह गई। क्योंकि उसका भी खेत जल चुका था। अब यह चिंता गांव वालो के मन में सताने लगी। फिर शाम होते होते सभी लोग अपनी अपनी घरों में चले गए।

ठीक रात को जब सभी गांव वाले सोने जा रहे थे। तभी सोनू की पत्नी मीना की नजर उस पानी की टंकी पर पड़ी। क्योंकि उसके घर की खिड़की से टकी साफ दिखाई देती थी। टंकी पर कोई औरत स्नान कर रही थी। यह दृश्य देख कर मीना को कुछ समझ नही आ रहा था इतनी रात को कोन स्नान कर रही है और मीना यह जानने टंकी की ओर चल पड़ी। वहा पहुंच कर मीना ने उस औरत से कई सवाल की ,तुम कोन हो और इतनी रात को क्यों स्नान कर रही हो। लेकिन उस औरत ने एक भी जवाब नही दिए। ओर उसका मुख विपरीत दिशा में होने के कारण मीना उसे नहीं देख पा रही थी।

मीना के किसी सवाल का जवाब न मिलने के कारण मीना ने गुस्से में आ कर उसके सर पर डंडे से दे मारा। अरे ये क्या वो स्त्री धीरे धीरे टंकी में अंदर चली गई। अब मीना को यह डर सताने लगी की कही वह पानी के अंदर डूब कर मर न जाए। इसलिए वह दौड़ती हुई अपने घर आई और अपने पति सोनू को सारी बाते बता दी। अब दोनो मिलकर उसे ढूंढने चले गए। हालाकि टंकी सिर्फ 4 फूट गड्ढा था फिर भी उन्हे बहर से कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। तो सोनू ने पानी के अंदर छलांग लगाई । छलांग लगाने के 15 मिनट तक जब सोनू का कोई पता नहीं चला तो मीना जोर जोर से चिल्लाने लगी जिससे सभी गांव वाले इकट्ठा हो गए। गांव वालो के पूछने पर उसने सारी बाते बता दी।

अब गांव के पंचायत ने दो लोगो को एक साथ टंकी के अंदर भेजा । लेकिन वो दोनो भी बाहर नही आए। और ये क्या टंकी के अंदर से अजीब अजीब डरावनी आवाज आने लगी । ओर तभी उस अंधेरी रात में टंकी से एक औरत निकलती है और स्नान करने लगती है। उसे देख गांव वाले ने उसे पकड़ने के लिए रस्सी फेकते है । ओर रस्सी उस औरत के गले में फस जाति है। यह देख गांव वाले रस्सी को खींचने लगते है। जिससे वह औरत गुस्सा होकर गुर्राने लगती है और अपना चेहरा गांव वालो की ओर घुमाती है। उसे देख गांव वाले चिल्लाने लगते है। अरे ये तो चुड़ेल हैं। अब चुडेल हसने लगती है और रस्सी को खींचते हुए टंकी में चली जाती है। ओर कुछ गांव वाले भी रस्सी के साथ पानी में चले जाते है। यह दृश्य देख सभी गांव वाले डर जाते है और वहा से भाग जाते है।

फिर अगली सुबह सभी गांव वाले मिल कर एक तरकीब निकालते हैं। और फिर रात को छुप कर उस चुड़ेल के आने का इंतजार करने लगते है। चुड़ेल के आते ही गांव वाले फिर से उसके गले में रस्सी फसा देते है और रस्सी के दूसरी छोर में बजरंगबली की मूर्ति को बांध देते है। लेकिन ये क्या चुड़ेल तो बजरंगबली की मूर्ति को भी लेकर चली जाती है।अब गाव वालो को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि तभी टंकी से एक रोशनी निकलती है और वह टंकी फट जाती है। ओर उसमे से सभी गांव वाले जीवित बाहर निकल जाते है। और इस प्रकार वह गांव चुड़ेल से मुक्त हो जाता है।

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