hindi viram chinh

दोस्तो आज के इस लेख में हम लोग जानेंगे विराम चिन्ह के बारे में। hindi viram chinh कितने प्रकार के होते है? प्रयोग इत्यादि। अगर आप विराम चिन्ह के प्रयोग को लेकर भ्रमित है तो आप इस लेख को अंत तक जरूर पढ़े। मुझे यकीन है, की इस लेख को पूरा पढ़ने के बाद आपके सारे भ्रम दूर हो जाएंगे।

विराम चिन्ह किसे कहते है?(hindi viram chinh)

विराम का अर्थ होता है _ विश्राम अथवा ठहराव। जब हम अपनी भावनाओं को दूसरे के समक्ष प्रकट करते हैं तब एक विचार या उसके कुछ अंश को प्रकट करने के बाद हम थोड़ा देर रुकते है, इसे ही विराम कहते है। और इसे स्पष्ट करने के लिए जिन चिन्हों का प्रयोग किया जाता है, उसे विराम चिन्ह कहते है।

विराम चिन्ह न सिर्फ ठहराव को सूचित करता है, बल्कि किसी वाक्य के पदो , वाक्यांशो , तथा खंडों के बीच प्रयुक्त होकर विभन्न भावों को प्रकट करते है। विराम चिन्ह के गलत प्रयोग से अर्थ का अनर्थ हो जाता है। यानी वाक्य का अर्थ बदल जाता है।

हिंदी भाषा में अनेक प्रकार के चिन्हों का प्रयोग किया जाता है। इन चिन्हों को दो भागों में बाटा गया है।

• विराम चिन्ह
• भाव चिन्ह (मनोभाव)

1. विराम चिन्ह
• पूर्ण विराम चिन्ह (full stop) – । या .
• अपूर्ण विराम चिन्ह (colon )- :
• अर्द्ध विराम चिन्ह (semicolon ) – ;
• अल्प विराम चिन्ह (comma ) – ,

• पूर्ण विराम चिन्ह (full stop) – । या .

पूर्ण विराम चिन्ह समाप्ति को सूचित करता है। अतः प्रत्येक वाक्य की समाप्ति पर इस चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।
जैसे –
मैं प्रतीदिन विद्यालय जाता हूं।

• अपूर्ण विराम चिन्ह (colon ) – :

एक वाक्य के समाप्त हो जाने पर भी वाक्य का भाव समाप्त नही होता है, आगे की जिज्ञासा बनी रहती है, अतः यहां पर कम देर तक ठहरते हुए आगे तक पढ़ते जाते है , जब तक वाक्य का भाव पूरा न हो। जैसे –
सुभाष चंद्र बोस ने कहा : तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा।

hindi viram chinh
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• अर्द्ध विराम चिन्ह (semicolon ) – ;

जहां अपूर्ण विराम से भी कम ठहराव का संकेत होता है वहां अर्द्ध विराम चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। और लगातार आने वाले पदबंधों के बीच भी अर्द्ध विराम चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। जैसे –
जब मेरे पास पैसे होगे ; तब मै यह खरीदुगा।

• अल्प विराम चिन्ह (comma ) – ,

वाक्य में जहां सबसे कम ठहराव होता है, वहा अल्प विराम चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। इस चिन्ह का प्रयोग निम्न स्थानों पर होता है।
• जहां एक तरह के कई वाक्य , वाक्यांश और शब्द एक साथ आते है। उनके बीच अल्प विराम चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।

• अंको को लिखते समय भी अल्प विराम चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।

• हां , जी , बस , नही , अतः , अच्छा , बल्कि , क्योंकि आदि से शुरू होने वाले शब्दो के बाद अल्प विराम चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।

• संबोधित संज्ञा के बाद अल्प विराम चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।

• जब हां अथवा नहीं को वाक्य से पृथक किया जहा है तो अल्प विराम चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।

2. भाव चिन्ह ( मनोभाव चिन्ह )

• प्रश्नबोधक चिन्ह ( Question mark) – ?

प्रश्न का बोध कराने वाले वाक्य के अंत में प्रश्नबोधक चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। साधारणतः जिन वाक्यों में कोन , कब , कैसे , कहा , क्या , क्यों आदि प्रश्न भाव व्यक्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है। वहां प्रश्न बोधक चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। जैसे –
तुम्हारा नाम क्या है ?

• विस्मयादिबोधक चिन्ह ( Exclamation mark ) – !

हर्ष , घृणा , शोक , प्रेम , करुणा , भय , विवाद आदि भावो को प्रकट करने के वाले शब्दो के आगे विस्मयादिबोधक चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। जैसे –
वाह ! इसी तरह सफल होते रहो।

• निर्दशक चिन्ह ( Dash ) – _ _

किसी विषय , विचार के भाव को स्पष्ट करने के लिए निर्दशक चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।
• जैसा , उदाहरण आदि शब्दो के बाद निर्दशक चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।
• किसी रचना के अन्त में रचनाकार का नाम देने के लिए निर्दशक चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।
• संवादों को लिखने के लिए निर्दशक चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।
• बार – बार अर्थ की स्पष्टता के लिए निर्दशक चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।

• योजक चिन्ह (Hyphen ) – – –

द्वंद्व समास के दो पदो के बीच , युग्म शब्दो के बीच , सहचर शब्दो के बीच योजक चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। जैसे –
दिन – रात , माता -पिता , इधर -उधर , पानी -ही -पानी

• कोष्ठक चिन्ह ( Bracket ) – ()

कोष्ठक चिन्ह का प्रयोग अर्थ स्पष्ट करने , भाव को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है। जैसे –
वह अनवरत (लगातार ) काम करता रहा।

•उद्धरण चिन्ह ( inverted comma ) – ” “/ ‘ ‘

उद्धरण चिन्ह का प्रयोग निम्नलिखित प्रकार से होते है।
• वाक्य में कहावत में उद्धरण चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।
• किसी शब्द को विषेस रूप से दर्शाने के लिए उद्धरण चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।
• किसी शब्द के व्यंग्यार्थ प्रयोग में उद्धरण चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।

• लाघव चिन्ह ( short sign) – ०

किसी प्रचलित बड़े शब्द के छोटे रूप को दर्शाने के लिए लाघव चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। जैसे –
डा० , पं० आदि।

• विवरण चिन्ह ( colon dash )

जब किसी पद की व्याख्या करनी हो या उसके संबंध में विस्तार से कुछ कहना हो तब विवरण चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। जैसे –
किसी शब्द की परिभाषा लिखते समय विवरण चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।

• लोप चिन्ह (elimination ) – ……

इस चिन्ह का प्रयोग कई जगहों पर विभिन्न उद्देश्यों से किया जाता है। जैसे –
•रिक्त स्थान को दिखाने के लिए लोप चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।
• वाक्य में छोड़े गए अंश के लिए लोप चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।
• गोपनीय या अश्लील पदो को छुपाने के लिए लोप चिन्ह का प्रयोग किया जाता है।

• त्रुटि चिन्ह ( error ) – ^

वाक्य में किसी पद या वाक्य के छूट जाने पर उस स्थान पर त्रुटि चिन्ह का प्रयोग कर ठीक उसके ऊपर छूटे अंश को लिख कर उसे ठीक किया जाता है। जैसे –
बस
मोहन रोज ^ से स्कूल जाता है।

• अनुवृति चिन्ह – ,,

जब एक ही शब्द बार बार ठीक नीचे लिखना पड़ता है तब अनुवृती चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। जैसे –
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी
,, हजारी प्रसाद द्विवेदी
,, रामचंद्र शुक्ल

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